65 बिल्डर्स फर्जी RERA सर्टिफिकेट के साथ काम कर रहे थे — किसी को भनक तक नहीं लगी
साल 2021 में, आर्किटेक्ट संदीप पाटिल ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया कि कल्याण-डोंबिवली (महाराष्ट्र) में 65 बिल्डर्स फर्जी RERA रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के सहारे धड़ल्ले से प्रोजेक्ट्स बेच रहे थे। उन्होंने जाली कमेंसमेंट सर्टिफिकेट (CC) बनाए, नगर निगम की नकली मंजूरियां वेबसाइट पर अपलोड कीं और सिस्टम से वैध दिखने वाले RERA नंबर्स हासिल कर लिए। आम खरीदारों ने यह मानकर कि वे RERA द्वारा सुरक्षित हैं, प्रति फ्लैट 20 से 80 लाख रुपये तक का भुगतान कर दिया।
RERA ने उन्हें नहीं पकड़ा। नगर निगम के अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। उन्हें तब पकड़ा गया जब एक आम नागरिक ने नगर निगम कार्यालय जाकर दस्तावेजों का क्रॉस-वेरिफिकेशन (भौतिक मिलान) किया।
यही इस व्यवस्था की सबसे बड़ी कमजोरी है: RERA रजिस्ट्रेशन पूरी तरह से सेल्फ-डिक्लेरेशन (स्व-घोषणा) पर आधारित है। बिल्डर जो कुछ भी पोर्टल पर अपलोड करता है, अथॉरिटी उसे स्वीकार कर लेती है। दस्तावेजों की असल जांच केवल तब होती है जब कोई औपचारिक शिकायत दर्ज कराई जाती है। तब तक, एक जाली सर्टिफिकेट भी दिखने में बिल्कुल असली जैसा ही लगता है।
यदि आप भी कोई फ्लैट बुक करने जा रहे हैं, तो एक भी रुपया ट्रांसफर करने से पहले इस गाइड को पूरा पढ़ें। और अगर बुकिंग के बाद चीजें खराब हो जाएं तो क्या करना चाहिए, इसके लिए हमारा ब्लॉग RERA की हकीकत — शिकायतों ने क्या सच उजागर किया पढ़ें।
RERA रजिस्ट्रेशन का असली मतलब क्या है (और क्या नहीं है)
RERA रजिस्ट्रेशन का मतलब केवल यह है कि बिल्डर ने कागजात — जैसे जमीन का मालिकाना हक, निगम की मंजूरियां, प्रोजेक्ट का नक्शा और प्रमोटर का विवरण — सिस्टम में सबमिट कर दिए हैं और अथॉरिटी ने आवेदन को प्रोसेस कर दिया है। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि किसी अधिकारी ने मौके पर जाकर या विभागों में जाकर उन कागजातों के असली होने की पुष्टि की है।
इसे आयकर रिटर्न (Income Tax Return) दाखिल करने जैसा समझें। विभाग आपके सबमिट करते ही रिटर्न स्वीकार कर लेता है। उसकी गहन जांच (Scrutiny) बाद में होती है, वह भी केवल कुछ चुनिंदा मामलों में।
RERA रजिस्ट्रेशन से आपको क्या मिलता है:
- बिल्डर द्वारा डिफॉल्ट करने पर शिकायत करने के लिए एक कानूनी मंच (Forum)
- एक अनिवार्य एस्क्रो अकाउंट (खरीदार के पैसे का 70% हिस्सा इसी में जमा होता है)
- प्रोजेक्ट पूरा करने की एक निश्चित समयसीमा और देरी होने पर पेनाल्टी का प्रावधान
- स्वीकृत नक्शों, प्रमोटर के विवरण और प्रोजेक्ट के स्टेटस की पारदर्शिता
RERA रजिस्ट्रेशन से आपको क्या नहीं मिलता:
- इस बात का पक्का सबूत कि जमीन का टाइटल (मालिकाना हक) एकदम साफ और विवाद-मुक्त है
- इस बात की पुष्टि कि नगर निगम से मिली मंजूरियां 100% असली हैं
- बिल्डर की वित्तीय स्थिति या लोन चुकाने की क्षमता का कोई आकलन
- निर्माण कार्य की क्वालिटी (Construction Quality) की कोई गारंटी
प्रोजेक्ट में देरी होने या निर्माण में खराबी होने पर RERA के नियमों के तहत आपको क्या मुआवजा मिल सकता है, इसके लिए RERA डिलेड पजेशन मुआवजा गाइड और RERA 5-वर्षीय स्ट्रक्चरल डिफेक्ट वारंटी गाइड देखें।
RERA किसकी जांच करता है और किसकी नहीं?
| पैरामीटर / दस्तावेज | क्या RERA भौतिक सत्यापन करता है? | आपको किसके पास जाकर जांच करनी चाहिए? |
|---|---|---|
| बिल्डर की पहचान (PAN, कंपनी रजिस्ट्रेशन) | हाँ — बेसिक KYC जांच | रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (MCA पोर्टल) |
| लैंड टाइटल / मालिकाना हक की चेन | नहीं — केवल स्व-घोषणा स्वीकार करता है | स्वतंत्र प्रॉपर्टी वकील (Property Lawyer) |
| भारमुक्ति प्रमाण पत्र (Encumbrance Certificate) | नहीं | उप-पंजीयक कार्यालय (Sub-registrar office) |
| नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन | नहीं — सिर्फ अपलोड की गई कॉपी मानता है | सीधे संबंधित नगर निगम कार्यालय से |
| कमेंसमेंट सर्टिफिकेट (CC) | नहीं — सिर्फ अपलोड की गई कॉपी मानता है | सीधे संबंधित नगर निगम कार्यालय से |
| पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearance) | नहीं | राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) |
| बिल्डर का पुराना डिलीवरी ट्रैक रिकॉर्ड | नहीं | गूगल सर्च, RERA शिकायत इतिहास, पुरानी साइट्स का दौरा |
| निर्माण की गुणवत्ता (Construction Quality) | नहीं | स्वतंत्र स्ट्रक्चरल इंजीनियर |
| प्रोजेक्ट की वित्तीय स्थिति (Financial Viability) | नहीं | बिल्डर के ऑडिटेड फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट्स |
| एस्क्रो अकाउंट का होना | हाँ — खाते का विवरण रिकॉर्ड पर लिया जाता है | संबंधित बैंक से एस्क्रो होने की पुष्टि |
पैटर्न बिल्कुल साफ है: RERA सिर्फ कागजी औपचारिकताएं देखता है, जमीनी हकीकत नहीं। मालिकाना हक, मंजूरियां और बिल्डर की विश्वसनीयता की हर महत्वपूर्ण जांच करने की पूरी जिम्मेदारी केवल आपकी है।
स्टेप-बाय-स्टेप: राज्य के पोर्टल्स पर RERA रजिस्ट्रेशन की जांच कैसे करें
स्टेप 1: अपने राज्य का आधिकारिक RERA पोर्टल पहचानें (नीचे दी गई टेबल देखें)।
Step 2: बिल्डर द्वारा दिए गए RERA रजिस्ट्रेशन नंबर से सर्च करें। यदि बिल्डर ने नंबर नहीं दिया है, तो प्रोजेक्ट के नाम या प्रमोटर/कंपनी के नाम से खोजें।
स्टेप 3: पोर्टल पर रिजल्ट आने के बाद इन 6 मुख्य जानकारियों को बारीकी से मिलाएं:
- प्रोजेक्ट का नाम — यह बिल्कुल वही होना चाहिए जो बिल्डर अपने विज्ञापनों या ब्रोशर में इस्तेमाल कर रहा है।
- प्रमोटर/डेवलपर कंपनी का नाम — यह नाम आपके बुकिंग एग्रीमेंट (Alloottment Letter) पर लिखे नाम से हूबहू मैच होना चाहिए।
- रजिस्ट्रेशन की वैधता तारीख (Validity Date) — यह तारीख समाप्त (Expire) नहीं होनी चाहिए।
- स्वीकृत यूनिट्स और मंजिलों की संख्या — यदि बिल्डर आपको 15वीं मंजिल पर फ्लैट बेच रहा है लेकिन पोर्टल पर केवल 12 मंजिलों की ही मंजूरी दिख रही है, तो ऊपर की 3 मंजिलें पूरी तरह अवैध हैं।
- स्वीकृत लेआउट प्लान — पोर्टल से स्वीकृत नक्शे का पीडीएफ डाउनलोड करें और उसकी तुलना बिल्डर के रंग-बिरंगे ब्रोशर से करें।
- शिकायत का इतिहास (Complaint History) — देखें कि क्या इस प्रोजेक्ट या इस बिल्डर के अन्य प्रोजेक्ट्स के खिलाफ पहले से ही अन्य खरीदारों ने शिकायतें दर्ज कराई हैं।
स्टेप 4: पोर्टल पर दिख रहे लैंड सर्वे नंबर (Land Survey Number) का मिलान उप-पंजीयक या नगर निगम कार्यालय के रिकॉर्ड से करें।
स्टेप 5: स्क्रीनशॉट जरूर लें। पोर्टल्स के डेटा में बदलाव हो सकते हैं और अतीत में ऐसे मामले आए हैं जहां बिल्डर्स ने बाद में अपलोड किए गए दस्तावेजों में हेरफेर करने की कोशिश की है।
राज्यों के RERA पोर्टल्स की डायरेक्टरी
| राज्य | पोर्टल का नाम | आधिकारिक वेबसाइट लिंक |
|---|---|---|
| महाराष्ट्र | MahaRERA | maharera.maharashtra.gov.in |
| उत्तर प्रदेश | UP RERA | up-rera.in |
| कर्नाटक | K-RERA | rera.karnataka.gov.in |
| तमिलनाडु | TNRERA | tnrera.in |
| हरियाणा | Haryana RERA | haryanarera.gov.in |
| गुजरात | GujRERA | gujrera.gujarat.gov.in |
| राजस्थान | Rajasthan RERA | rera.rajasthan.gov.in |
| पश्चिम बंगाल | HIRA (RERA नहीं) | hlogin.wbhira.gov.in |
| तेलंगाना | Telangana RERA | rera.telangana.gov.in |
| केरल | Kerala RERA | rera.kerala.gov.in |
ध्यान दें कि पश्चिम बंगाल RERA के बजाय HIRA के तहत काम करता है। HIRA के तहत खरीदारों को मिलने वाली सुरक्षा काफी कमजोर है — जैसे इसमें 70% रकम एस्क्रो खाते में रखना अनिवार्य नहीं है और बिल्डर पर पेनाल्टी के नियम भी ढीले हैं।
बुकिंग करने से पहले 9 बड़े रेड फ्लैग्स (चेतावनी के संकेत)
1. “RERA रजिस्ट्रेशन अभी प्रोसेस में है” — इसका सीधा मतलब है कि प्रोजेक्ट अभी रजिस्टर्ड नहीं है। RERA की धारा 3 के तहत बिना रजिस्ट्रेशन के फ्लैट बेचना या बुकिंग लेना पूरी तरह गैरकानूनी है। ऐसे प्रोजेक्ट से तुरंत दूर हो जाएं।
2. 24-48 घंटों के भीतर बुकिंग करने का भारी दबाव — किसी भी वैध और सही प्रोजेक्ट के ऑफर्स रातों-रात खत्म नहीं होते। जल्दबाजी का माहौल बनाना जालसाजों का सबसे पुराना तरीका है।
3. मार्केटिंग मटेरियल पर RERA नंबर का न होना — कानूनन हर विज्ञापन, होर्डिंग या ब्रोशर पर RERA नंबर छापना अनिवार्य है। अगर नंबर गायब है, तो यह कानून का सीधा उल्लंघन है।
4. RERA नंबर का राज्य के पोर्टल पर न दिखना — हो सकता है कि बिल्डर ने कोई फर्जी नंबर बना लिया हो। कल्याण-डोंबिवली के 65 बिल्डरों ने ठीक यही तरीका अपनाया था।
5. पोर्टल का विवरण ब्रोशर से मेल न खाना — अलग कंपनी का नाम, अलग प्रोजेक्ट का नाम या मंजिलों की संख्या में अंतर। इसका मतलब हो सकता है कि बिल्डर अपने किसी दूसरे रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट के नंबर का इस्तेमाल इस नए अवैध प्रोजेक्ट को बेचने के लिए कर रहा है।
6. एक्सपायर हो चुका RERA रजिस्ट्रेशन — हर रजिस्ट्रेशन की एक तय समयसीमा होती है जो प्रोजेक्ट पूरा होने की तारीख से जुड़ी होती है। यदि तारीख निकल चुकी है, तो बिल्डर उस प्रोजेक्ट में कानूनी रूप से नया सेल नहीं कर सकता।
7. एक ही RERA नंबर कई अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर होना — हर प्रोजेक्ट को एक अनूठा (Unique) RERA नंबर मिलता है। यदि आपको दो अलग-अलग लोकेशंस के प्रोजेक्ट्स पर एक ही नंबर दिखे, तो उनमें से एक निश्चित रूप से फर्जी है।
8. बिल्डर द्वारा एस्क्रो अकाउंट की जानकारी देने से मना करना — नियम के मुताबिक खरीदारों के पैसे का 70% हिस्सा एक विशेष एस्क्रो खाते में जाना चाहिए। अगर बिल्डर बैंक का नाम और अकाउंट नंबर देने में आनाकानी करे, तो समझ जाएं कि वह खाता वजूद में ही नहीं है।
9. “सीमित स्लॉट्स” के साथ प्री-लॉन्च कीमतें — बिना RERA नंबर के प्री-लॉन्च पूरी तरह अवैध है। कम कीमत सिर्फ एक चारा है। अगर बाद में प्रोजेक्ट रजिस्टर नहीं हुआ, तो आप RERA में शिकायत भी नहीं कर पाएंगे।
छूट के लूपहोल्स — वे प्रोजेक्ट्स जहाँ शून्य (ZERO) RERA सुरक्षा मिलती है
हर रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के लिए RERA रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी नहीं होता। कानून में कुछ बड़ी छूटें दी गई हैं जिनका बिल्डर्स गलत फायदा उठाते हैं:
| छूट की श्रेणी | मिलने वाली RERA सुरक्षा | खरीदार के लिए जोखिम |
|---|---|---|
| जमीन का क्षेत्रफल 500 वर्ग मीटर से कम होना | बिल्कुल शून्य | कोई एस्क्रो नियम नहीं, कोई तय समयसीमा नहीं, कोई शिकायत मंच नहीं। |
| अपार्टमेंट्स की कुल संख्या 8 से कम होना | बिल्कुल शून्य | ऊपर जैसा ही समान जोखिम। |
| बिना किसी सुविधा (Amenities) के वादे वाले प्लॉटेड प्रोजेक्ट्स | बिल्कुल शून्य | बिल्डर सिर्फ जमीन के टुकड़े बेचकर गायब हो सकता है। |
| RERA कानून आने से पहले कंपीटीशन सर्टिफिकेट पा चुके प्रोजेक्ट्स | बिल्कुल शून्य | प्रोजेक्ट पहले ही पूरा हो चुका है — इसका रिस्क प्रोफाइल अलग होता है। |
| पुरानी इमारतों का रेनोवेशन या मरम्मत कार्य | बिल्कुल शून्य | आमतौर पर ये कम कीमत वाले छोटे सौदे होते हैं। |
बिल्डर्स इस छूट का फायदा कैसे उठाते हैं:
मान लेते हैं कि एक बिल्डर के पास 3 एकड़ जमीन है और वह वहां 120 फ्लैट्स बनाना चाहता है। वह कानूनी सुरक्षा से बचने के लिए कागजों पर उस पूरे प्रोजेक्ट को 6-6 या 7-7 यूनिट्स वाले कई छोटे-छोटे सब-प्लॉट्स में बांट देता है। चूंकि हर सब-पॉट में 8 से कम यूनिट्स हैं, इसलिए उनमें से किसी को भी RERA रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं पड़ती।
इसका नतीजा: खरीदार 50-80 लाख रुपये पूरे देता है, लेकिन उसे RERA की कोई सुरक्षा नहीं मिलती। बिल्डर काम में 5 साल की देरी करे तो भी उस पर कोई पेनाल्टी नहीं लगती।
खुद को कैसे बचाएं: बिल्डर से सीधे लिखित में पूछें कि क्या यह सब-पॉट किसी बड़े टाउनशिप या डेवलपमेंट का हिस्सा है? खुद साइट पर जाकर देखें कि वहां वास्तव में कितनी इमारतों का निर्माण चल रहा है।
NRI खरीदारों के साथ होने वाले फ्रॉड का पैटर्न
रियल एस्टेट धोखाधड़ी में सबसे ज्यादा नुकसान प्रवासी भारतीयों (NRIs) को उठाना पड़ता है। इसका एक तय और पुराना पैटर्न है:
स्टेप 1: भारत में रहने वाला कोई रिश्तेदार या NRI दोस्त किसी प्रोजेक्ट की तारीफ करता है — “मैंने खुद वहां निवेश किया है, बहुत बढ़िया रिटर्न मिल रहा है।”
स्टेप 2: NRI खरीदार को वॉट्सऐप पर चमचमाता ब्रोशर, वीडियो कॉल पर साइट का टूर और RERA सर्टिफिकेट की एक पीडीएफ कॉपी भेज दी जाती है। दूरी के कारण कोई भी व्यक्ति पोर्टल पर जाकर उस नंबर को क्रॉस-चेक नहीं करता।
स्टेप 3: NRE/NRO अकाउंट या परिवार के सदस्यों के जरिए 20 से 50 लाख रुपये की बड़ी रकम सीधे बिल्डर के खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है।
स्टेप 4: कुछ समय बाद निर्माण कार्य रुक जाता है, बिल्डर फोन उठाना बंद कर देता है, या जब NRI 12-18 महीने बाद भारत आता है, तो उसे पता चलता है कि साइट पर वैसा कुछ बना ही नहीं है जैसा वादा किया गया था।
एक NRI के रूप में खुद को कैसे सुरक्षित रखें:
- किसी भी बिचौलिए या रिश्तेदार के मौखिक आश्वासन पर भरोसा न करें। खुद अपने लैपटॉप से राज्य के RERA पोर्टल पर जाएं — भारत के सभी RERA पोर्टल्स को विदेशों से भी आसानी से एक्सेस किया जा सकता है।
- एक स्थानीय स्वतंत्र वकील को नियुक्त करें जो मौके पर जाकर साइट का भौतिक निरीक्षण करे और सब-पंजीयक कार्यालय से 30 साल की टाइटल सर्च रिपोर्ट निकाले। इसके लिए 15,000 से 30,000 रुपये का बजट रखें। 50 लाख या 1 करोड़ के सौदे में यह बहुत सस्ती और बेहतरीन बीमा पॉलिसी है।
- केवल रजिस्टर्ड एग्रीमेंट्स (Registered Sale Agreement) पर ही लेनदेन करें। बिना रजिस्टर्ड नोटरी वाले कागजातों की कानून की नजर में प्रॉपर्टी ट्रांसफर के लिए कोई कीमत नहीं होती।
- पैसा कभी भी किसी व्यक्ति या बिल्डर के पर्सनल खाते में न डालें। भुगतान हमेशा डेवलपर कंपनी के आधिकारिक खाते या RERA-अनिवार्य एस्क्रो अकाउंट में ही होना चाहिए।
10-पॉइंट वेरिफिकेशन चेकलिस्ट (RERA पोर्टल के आगे की जांच)
RERA पोर्टल पर नंबर चेक करना सिर्फ पहला कदम है। सुरक्षित निवेश के लिए बाकी के 9 कदम भी उतने ही जरूरी हैं:
| चेक / जांच का प्रकार | कहाँ और कैसे जांचें? | अनुमानित लागत | लगने वाला समय |
|---|---|---|---|
| 1. राज्य के पोर्टल पर RERA रजिस्ट्रेशन | आधिकारिक RERA वेबसाइट पर | मुफ्त | 10 मिनट |
| 2. लैंड टाइटल सर्च (30 वर्षों का रिकॉर्ड) | वकील के जरिए सब-पंजीयक कार्यालय में | Rs 5,000 - 15,000 | 7 से 15 दिन |
| 3. भारमुक्ति प्रमाण पत्र (15-वर्षीय EC) | उप-पंजीयक कार्यालय (Sub-registrar) | Rs 200 - 500 | 3 से 5 दिन |
| 4. नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन | सीधे नगर निगम कार्यालय जाकर (या RTI से) | मुफ्त | 7 से 30 दिन |
| 5. कमेंसमेंट सर्टिफिकेट (CC) का वेरिफिकेशन | सीधे नगर निगम कार्यालय जाकर (या RTI से) | मुफ्त | 7 से 30 दिन |
| 6. पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearance) | राज्य की SEIAA वेबसाइट पर | मुफ्त | 10 मिनट |
| 7. बिल्डर के पुराने प्रोजेक्ट्स का ट्रैक रिकॉर्ड | गूगल रिव्यूज, RERA शिकायत सेक्शन, पुरानी साइट्स | मुफ्त | 1 से 2 दिन |
| 8. एस्क्रो अकाउंट की पुष्टि | जिस बैंक में खाता है, वहां से कंफर्मेशन पत्र | मुफ्त (बिल्डर के जरिए) | 3 से 5 दिन |
| 9. स्वीकृत लेआउट प्लान का ब्रोशर से मिलान | पोर्टल से नक्शा डाउनलोड कर ब्रोशर से मिलाएं | मुफ्त | 30 मिनट |
| 10. फिजिकल साइट विजिट और पड़ोसियों से पूछताछ | खुद साइट पर जाएं और आसपास के लोगों से पूछें | सिर्फ यात्रा खर्च | 1 दिन |
इस पूरी सघन जांच की कुल लागत: मात्र 5,000 से 15,000 रुपये। 50 लाख रुपये की प्रॉपर्टी की खरीद पर यह उसकी कुल कीमत का महज 0.1% से 0.3% है। महज़ 10,000 रुपये बचाने के चक्कर में इस जांच को छोड़ देना ही वह मुख्य कारण है जिससे लोग अपनी जिंदगी भर की कमाई (50 लाख रुपये) गंवा बैठते हैं।
यदि आपको धोखाधड़ी का पता चले, तो किस फोरम का दरवाजा खटखटाएं?
यदि आपकी जांच में यह सामने आता है कि बिल्डर ने जाली दस्तावेज लगाए हैं, अवैध निर्माण किया है या फर्जी RERA नंबर दिखाया है, तो आपके पास शिकायत के लिए कई कानूनी मंच उपलब्ध हैं। सही मंच का चुनाव आपकी फंसी हुई रकम और फ्रॉड की प्रकृति पर निर्भर करता है। इसका विस्तृत विश्लेषण आप हमारे ब्लॉग RERA बनाम कंज्यूमर कोर्ट बनाम NCLT — आपके लिए कौन सा फोरम सबसे बेहतर है पर पढ़ सकते हैं।
धोखाधड़ी सामने आने पर तुरंत ये कदम उठाएं:
- राज्य के RERA पोर्टल पर जाकर तुरंत ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
- स्थानीय पुलिस स्टेशन में जाकर बिल्डर के खिलाफ जालसाजी और धोखाधड़ी की FIR दर्ज कराएं (BNS की धारा 318 और 336 के तहत)।
- जिला कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर को लिखित में शिकायत सौंपें।
- अपनी रकम को ब्याज सहित वापस पाने के लिए एक अच्छे सिविल/रियल एस्टेट वकील से सलाह लें।
बिल्कुल भी इंतजार न करें। जो बिल्डर्स जाली कागजात बनाने की हिम्मत रखते हैं, वे आमतौर पर एक साथ कई तरह के फ्रॉड्स कर रहे होते हैं। जितनी जल्दी आप शिकायत दर्ज करेंगे, बिल्डर द्वारा अपनी संपत्तियां छुपाने या देश से भागने से पहले आपकी रकम रिकवर होने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।
निष्कर्ष की बात
RERA रजिस्ट्रेशन होना किसी प्रोजेक्ट की सुरक्षा की अंतिम गारंटी नहीं है, यह सिर्फ एक न्यूनतम प्रवेश द्वार है। यह आपको केवल यह बताता है कि बिल्डर ने कागजी औपचारिकताएं पूरी करके सिस्टम में सबमिट कर दी हैं। यह आपको यह कभी नहीं बताता कि वे कागजात 100% असली हैं, जमीन पूरी तरह विवाद-मुक्त है या बिल्डर समय पर पजेशन दे ही देगा।
एक ही शहर में 65 जाली सर्टिफिकेट्स का मिलना यह साबित करने के लिए काफी है कि बिना भौतिक सत्यापन के सेल्फ-डिक्लेरेशन की इस व्यवस्था में कितनी बड़ी खामियां हैं। इसके ऊपर, कानून में दी गई छूटों का फायदा उठाकर बिल्डर्स बिना किसी रजिस्ट्रेशन के बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स बेच रहे हैं।
सुरक्षा का केवल एक ही नियम है: अपनी जांच खुद करें। किसी भी बड़े प्रोजेक्ट में अपनी मेहनत की कमाई लगाने से पहले स्वतंत्र कानूनी और जमीनी जांच के लिए 10,000 से 15,000 रुपये का बजट और 2-3 हफ्ते का समय जरूर निकालें। यह आपके जीवन की सबसे महंगी खरीद के लिए सबसे सस्ती और जरूरी बीमा पॉलिसी साबित होगी।